एक अह्सास -Ek Ahsaas Hindi shayari
एक अह्सास
नही चाह्ती तुमसे बात करना
फिर भी तुम्हारा ध्यान रखने का मन होता है।
नही चाह्ती तुम्हे याद करना
पर फिर भी दिल तुम्हारे लिए फरियाद करता है।
जिंदगी मे कितने जख्म दीये तुमने
पर फिर भी उसमे मरहम लगाने का मन करता है।
ये रिश्ते मुझे पसंद नही
फिर भी उन्हे निभाने को आगे बढ़ने का मन करता है।
किसी की नही चाहत मुझको
फिर भी एक उड़ान भरने को जी मचालता है।
मुझे नही है जरूरत तुम्हारी
पर फिर भी तुम्हारी खैरियत जानने को दिल धडकता है।
महलो की नही ख्वाहिस मुझको
सबके पास एक छत हो बस इतना ख्वाब रहता है।
लड़ना मुझे पसंद नही,
पर देश के लिए शहीद होने मे फक्र होता है।
लेखक: किरन गुप्ता

Comments
Post a Comment